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🕉️ Bhajans, Aartis & Mantras · Ep 10

Papankusha Ekadashi: Vrat Katha

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पापांकुशा एकादशी 2026 🙏 व्रत कथा, पूजा विधि, मंत्र और पारण | 22 अक्टूबर | एकादशी व्रत कथा

This video is narrated in Hindi; YouTube's auto-translated captions are available.

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नमस्ते, ज्योति यात्रा में आपका स्वागत है। आइए, श्रद्धा से सुनते हैं आज की पावन व्रत कथा। दशहरे के ठीक बाद आती है पापांकुशा एकादशी इस वर्ष गुरुवार, बाईस अक्टूबर। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं।

इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। कथा के अनुसार, एक बार राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से इस एकादशी का महत्व पूछा। तब श्रीकृष्ण ने यह कथा सुनाई। विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था।

वह बहुत क्रूर था, और उसने अपना पूरा जीवन दूसरों को कष्ट देने में बिता दिया। समय बीतता गया। जीवन के अंतिम दिनों में उसके मन में डर बैठ गया मेरे कर्मों का फल क्या होगा? कहते हैं, एक रात उसे सपने में यमराज के दूत दिखाई दिए।

वह काँप उठा, और सुबह होते ही सहायता खोजने निकल पड़ा। वह महर्षि अंगिरा के आश्रम पहुँचा और उनके चरणों में गिरकर बोला गुरुदेव, मैंने जीवन भर पाप किए हैं। क्या मेरे लिए भी कोई मार्ग है? ऋषि अंगिरा ने करुणा से कहा सच्चे पश्चाताप के लिए कभी देर नहीं होती।

आश्विन शुक्ल एकादशी का व्रत श्रद्धा से करो। क्रोधन ने विधि से व्रत किया उपवास रखा, भगवान विष्णु का स्मरण किया, और रात भर भजन-कीर्तन में जागरण किया। मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य से उसके पाप ऐसे कट गए, जैसे अंकुश से हाथी वश में होता है। अंत में उसे भगवान विष्णु के धाम की प्राप्ति हुई।

इसीलिए इसका नाम है पापांकुशा। यानी वह अंकुश, जो पापों रूपी मदमस्त हाथी को रोक देता है। पूजा की परंपरा सरल है सुबह स्नान करके भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल और दीप अर्पित करें, और व्रत का संकल्प लें। व्रत अपनी सामर्थ्य के अनुसार रखें निर्जल, फलाहार या एक समय सात्विक भोजन।

एकादशी पर चावल नहीं खाए जाते। भगवान विष्णु का मंत्र जपें ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। और विष्णु सहस्रनाम या इस कथा का पाठ करें। इस दिन दान का विशेष महत्व है अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल, या ज़रूरतमंद की कोई भी सहायता।

अगले दिन, द्वादशी को सूर्योदय के बाद शुभ समय में व्रत का पारण करें। सही समय अपने शहर के पंचांग से अवश्य देख लें। पापांकुशा एकादशी की सबसे बड़ी सीख अतीत कितना भी अंधेरा हो, सच्चा पश्चाताप और सद्कर्म जीवन की दिशा बदल सकते हैं। क्रोध, लोभ और अहंकार ये भी भीतर के मदमस्त हाथी हैं।

एकादशी का व्रत इन पर अंकुश लगाने का अभ्यास है। शाम को भगवान विष्णु की आरती करें ॐ जय जगदीश हरे और परिवार के साथ यह कथा सुनें। भगवान पद्मनाभ आप सबके जीवन के कष्ट हरें। पापांकुशा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। सुनने के लिए धन्यवाद। अगर यह वीडियो आपको अच्छा लगा, तो इसे अपने परिवार के साथ ज़रूर बाँटिए, और ऐसी ही पावन कथाओं के लिए जुड़े रहिए ज्योति यात्रा के साथ। भगवान की कृपा आप पर बनी रहे।

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