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🪔 Navratri 2026: Nine Goddesses, Nine Messages · Ep 10

Vijayadashami (Dussehra)

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विजयादशमी 2026 🏹 दशहरा की कथा: राम-रावण, दुर्गा-महिषासुर, शमी पूजा | नौ देवी, नौ संदेश

This video is narrated in Hindi; YouTube's auto-translated captions are available.

Read the full story (in Hindi)

आज विजयादशमी है दशहरा। नौ दिनों की साधना के बाद, विजय का दिन। अच्छाई की, बुराई पर जीत का पर्व। विजयादशमी यानी विजय की दशमी।

इस दिन से दो महान विजय-कथाएँ जुड़ी हैं भगवान राम की रावण पर विजय, और माँ दुर्गा की महिषासुर पर। पहली कथा वनवास में श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण पंचवटी में रहते थे। लंका के राजा रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया, और उन्हें लंका ले गया। श्रीराम ने हनुमान, सुग्रीव और वानर सेना के साथ समुद्र पर सेतु बाँधा, और लंका पहुँचे।

मान्यता है युद्ध से पहले श्रीराम ने नौ दिनों तक माँ दुर्गा की उपासना की। बंगाल की परंपरा में इसे अकाल बोधन कहा जाता है। कथा है कि उन्होंने एक सौ आठ नील कमल अर्पित करने का संकल्प लिया। एक कमल कम पड़ा, तो श्रीराम जिन्हें कमलनयन कहा जाता है अपना नेत्र अर्पित करने को तैयार हो गए।

तभी देवी प्रकट हुईं, और विजय का आशीर्वाद दिया। फिर हुआ महायुद्ध। और मान्यता है कि दशमी के दिन श्रीराम ने रावण का अंत किया। धर्म की जीत हुई।

माता सीता मुक्त हुईं, और पूरी सृष्टि ने उत्सव मनाया। दूसरी कथा माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया, और दसवें दिन उस पर विजय पाई। इसीलिए यह दिन विजया दशमी कहलाता है। बंगाल में आज सिंदूर खेला होता है विवाहित स्त्रियाँ माँ को सिंदूर अर्पित कर, एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।

और फिर माँ को विदा किया जाता है इस भाव के साथ कि अगले बरस तुम फिर आना। एक और कथा महाभारत से है। अज्ञातवास के समय पांडवों ने अपने दिव्य अस्त्र एक शमी के वृक्ष पर छिपाए थे। परंपरा है कि विजयादशमी के दिन ही वे अस्त्र फिर उठाए गए।

इसलिए आज शमी पूजन होता है। कई जगह लोग शमी या आपटा के पत्ते, सोना कहकर, एक-दूसरे को बाँटते हैं। मंत्र है शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥ अर्थ शमी पापों को शांत करती है, शत्रुओं का नाश करती है; उसने अर्जुन के धनुष को धारण किया, और वह श्रीराम को प्रिय है।

आज कई घरों में अपराजिता देवी की पूजा भी होती है वह शक्ति, जो कभी पराजित नहीं होती। और फिर शाम को रावण दहन। जब पुतला जलता है, तो लगता है जैसे बुराई जल गई। पर रावण के दस सिर दस बुराइयों के प्रतीक माने जाते हैं।

काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, स्वार्थ, और अन्याय। आज का सबसे बड़ा संदेश बाहर का रावण जलाना आसान है। असली विजय तब है, जब हम अपने भीतर का एक रावण हराएँ। कोई एक बुराई चुनिए गुस्सा, आलस्य, या कड़वे शब्द।

और आज से उस पर जीत की शुरुआत कीजिए। यही आपकी विजयादशमी है। कई जगह आज अपने औज़ारों, किताबों और वाहनों की पूजा होती है, और बच्चों का विद्यारंभ होता है। हर नई शुरुआत के लिए आज का दिन शुभ माना जाता है।

बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लीजिए, मिठाई बाँटिए, और पुराने गिले-शिकवे भूल जाइए। पिछले नौ दिनों में हमने नौ देवियों से नौ संदेश सीखे स्थिरता, तप, साहस, मुस्कान, ममता, न्याय के लिए खड़े होना, निर्भयता, क्षमा, और विनम्रता। इन संदेशों को केवल दस दिन नहीं, पूरे साल अपने साथ रखिए। ज्योति यात्रा के साथ यह यात्रा बनाने के लिए, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। अच्छाई की हमेशा जीत हो। ज्योति यात्रा से जुड़े रहिए जय श्री राम, जय माता दी।

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