🪔 Navratri 2026: Nine Goddesses, Nine Messages · Ep 2
Maa Brahmacharini
नवरात्रि दिन 2 🔱 माँ ब्रह्मचारिणी की कथा, मंत्र और पूजा विधि | नौ देवी, नौ संदेश
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आज नवरात्रि का दूसरा दिन है माँ ब्रह्मचारिणी का। तप, धैर्य और संयम की देवी। ब्रह्म का एक अर्थ है तप। ब्रह्मचारिणी यानी तप का आचरण करने वाली।
वे सादे सफ़ेद वस्त्र पहनती हैं, और नंगे पाँव चलती हैं। उनके दाहिने हाथ में जप की माला है, और बाएँ हाथ में कमंडल। माला निरंतर साधना की निशानी; और कमंडल सादगी और संतोष की। कथा है हिमालय की पुत्री पार्वती ने मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान लिया था।
मान्यता है कि नारद मुनि ने उन्हें कठोर तप का मार्ग बताया। राजमहल के सुख छोड़कर पार्वती वन में तप करने चल पड़ीं। माँ मैना ने रोका उ मा यानी, ऐसा मत करो। कहा जाता है, तभी से उनका एक नाम उमा पड़ा।
मान्यता है कि वर्षों तक उन्होंने केवल फल-फूल खाकर तप किया। फिर लंबे समय तक केवल शाक-पत्तियों पर रहीं। गर्मी, बरसात और कड़ाके की सर्दी हर मौसम में वे खुले आकाश के नीचे अपने तप में अडिग रहीं। फिर वर्षों तक केवल गिरे हुए बेलपत्र खाए और अंत में वे भी छोड़ दिए।
इसीलिए उन्हें अपर्णा कहा गया जिसने पत्ते भी त्याग दिए। शिव पुराण में कथा है महादेव स्वयं एक ब्रह्मचारी के वेश में आए, और पार्वती के सामने शिव की बुराई करने लगे वे श्मशान में रहते हैं, भस्म लगाते हैं… पार्वती ने दृढ़ता से कहा मुझे मेरे निश्चय से कोई नहीं डिगा सकता। यह सुनकर महादेव अपने असली रूप में प्रकट हो गए। तप पूरा हुआ।
महादेव ने उन्हें अपनाने का वचन दिया। देवताओं ने कहा ऐसा कठोर तप पहले किसी ने नहीं किया। उनका ध्यान मंत्र दधाना करपद्माभ्याम् अक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ अर्थ जो अपने कमल जैसे हाथों में अक्षमाला और कमंडल धारण करती हैं, वे सर्वश्रेष्ठ देवी ब्रह्मचारिणी मुझ पर प्रसन्न हों।
उनका नाम-मंत्र है ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः। इसे एक माला, यानी एक सौ आठ बार, शांत मन से जपा जा सकता है। आज का संदेश बड़ी चीज़ें धीरे-धीरे बनती हैं। बीज रातों-रात पेड़ नहीं बनता।
तप का अर्थ है रोज़ थोड़ा, पर लगातार। चाहे पढ़ाई हो, सेहत हो, या कोई सपना जो रोज़ अभ्यास करता है, और जल्दी हार नहीं मानता, वही अपना लक्ष्य पाता है। और जब लोग आपके संकल्प पर सवाल उठाएँ तो ब्रह्मचारिणी को याद कीजिए। शांत रहिए, विनम्र रहिए, पर अपने रास्ते पर टिके रहिए।
पूजा में माँ को सफ़ेद फूल, और मिश्री या शक्कर का भोग लगाने की परंपरा है। कई जगह इस दिन सफ़ेद रंग पहनना शुभ माना जाता है। पर याद रखिए सबसे बड़ा भोग है हमारा अपना संयम। आज कोई एक अच्छी आदत चुनिए, और इन नौ दिनों तक उसे निभाइए।
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। कल मिलेंगे माँ चंद्रघंटा के साथ। ज्योति यात्रा से जुड़े रहिए जय माता दी।



