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🪔 नवरात्रि 2026 — नौ देवी, नौ संदेश · भाग 3

नवरात्रि दिन 3 🔱 माँ चंद्रघंटा की कथा, मंत्र और पूजा विधि

3:55 · 2 दर्शन · 1 घं॰ पहले

नवरात्रि दिन 3 🔱 माँ चंद्रघंटा की कथा, मंत्र और पूजा विधि | नौ देवी, नौ संदेश

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आज नवरात्रि का तीसरा दिन है माँ चंद्रघंटा का। साहस और शांति, दोनों एक साथ। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है इसीलिए नाम पड़ा चंद्रघंटा। उनका वाहन सिंह है, और रंग स्वर्ण जैसा उज्ज्वल।

मान्यता है कि उनके घंटे की ध्वनि से बुरी शक्तियाँ दूर भागती हैं, और भक्तों का मन निर्भय हो जाता है। उनकी दस भुजाएँ हैं त्रिशूल, गदा, तलवार, धनुष-बाण, कमल, जपमाला और कमंडल। एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में। वे युद्ध के लिए तैयार भी हैं और भीतर से पूरी तरह शांत भी।

एक लोककथा प्रसिद्ध है। शिव और पार्वती के विवाह का दिन था। हिमालय के राजमहल में सब बारात की प्रतीक्षा कर रहे थे। पर महादेव आए अपने अनोखे रूप में भस्म लगाए, जटाएँ खुली, गले में सर्प, और साथ में भूत-प्रेत और गण।

यह रूप देखकर माँ मैना भयभीत होकर मूर्छित हो गईं। विवाह-मंडप में घबराहट फैल गई। तब पार्वती ने चंद्रघंटा का तेजस्वी रूप धारण किया शांत, पर अद्भुत शक्ति से भरा। उन्होंने विनम्रता से महादेव से प्रार्थना की प्रभु, मेरे परिवार के लिए अपना सौम्य रूप धारण कीजिए।

महादेव मुस्कुराए, और सुंदर दूल्हे के रूप में आए चंद्रशेखर। माँ मैना प्रसन्न हुईं, और विवाह आनंद से संपन्न हुआ। इस कथा का अर्थ गहरा है सच्ची शक्ति डराती नहीं, बल्कि डर को मिटाती है। चंद्रघंटा वही शक्ति हैं, जो अपनों की रक्षा करती है।

उनका ध्यान मंत्र पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥ अर्थ जो श्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं, और शक्तिशाली अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं, वे चंद्रघंटा नाम से प्रसिद्ध देवी मुझ पर कृपा करें। उनका नाम-मंत्र है ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः। इसे एक माला, यानी एक सौ आठ बार, शांत मन से जपा जा सकता है।

आज का संदेश साहस और शांति एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। सिंह जैसा बल हो, और मन चंद्रमा जैसा शीतल। जब किसी कठिन परिस्थिति का सामना करना हो कोई परीक्षा, कोई बड़ा फ़ैसला तो पहले गहरी साँस लीजिए। शांत मन से लिया गया निर्णय ही सबसे साहसी होता है।

मंदिर का घंटा भी यही सिखाता है एक ध्वनि, जो मन को वर्तमान क्षण में ले आती है। जागरूक रहिए डर अपने आप छोटा हो जाएगा। पूजा में माँ को दूध या दूध से बनी खीर का भोग लगाने की परंपरा है। कई जगह इस दिन लाल रंग पहनना शुभ माना जाता है।

पूजा के समय घंटी अवश्य बजाइए। पर याद रखिए माँ भाव से प्रसन्न होती हैं, सामग्री से नहीं। आज किसी एक डर का नाम लिखिए और उसे शांत मन से सामना करने का संकल्प लीजिए। या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

कल मिलेंगे माँ कूष्मांडा के साथ। ज्योति यात्रा से जुड़े रहिए जय माता दी।

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