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🪔 नवरात्रि 2026 — नौ देवी, नौ संदेश · भाग 9

नवरात्रि दिन 9 🔱 महानवमी: माँ सिद्धिदात्री की कथा, मंत्र और पूजा विधि

3:51 · 36 दर्शन · 3 दिन पहले

नवरात्रि दिन 9 🔱 महानवमी: माँ सिद्धिदात्री की कथा, मंत्र और पूजा विधि | नौ देवी, नौ संदेश

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आज नवरात्रि का नौवाँ दिन है महानवमी। आज पूजा होती है माँ सिद्धिदात्री की वे देवी, जो सभी सिद्धियाँ देने वाली हैं। सिद्धि यानी पूर्णता, सफलता। और दात्री यानी देने वाली।

नौ दिनों की साधना की पूर्णता यही हैं माँ सिद्धिदात्री। उनकी चार भुजाएँ हैं दाहिने हाथों में गदा और चक्र, बाएँ हाथों में कमल और शंख। वे कमल पर विराजती हैं, और उनका वाहन सिंह है। कथा है सृष्टि के आरंभ में जब कुछ नहीं था, तब भगवान शिव ने आदिशक्ति की उपासना की।

मान्यता है कि तब आदिशक्ति, सिद्धिदात्री रूप में, शिव के वाम अंग से प्रकट हुईं। तभी शिव कहलाए अर्धनारीश्वर। आधे शिव, आधी शक्ति। यह संदेश कि शिव और शक्ति अलग नहीं दोनों मिलकर ही पूर्ण हैं।

मान्यता है कि उन्होंने ही शिव को आठों सिद्धियाँ दीं अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व। देवता, ऋषि, सिद्ध, गंधर्व सभी उनकी उपासना करते हैं। और कहा जाता है कि साधारण भक्त पर भी उनकी कृपा उतनी ही बरसती है। पर शास्त्र यह भी कहते हैं सबसे बड़ी सिद्धि जादू नहीं, अपने मन पर विजय है।

जिसने मन जीत लिया, उसने सब जीत लिया। महानवमी पर कई घरों में हवन होता है, और नौ कन्याओं का पूजन कर नवरात्रि का समापन किया जाता है। नौ कन्याएँ नौ देवियों का रूप। उनके चरण धोकर, प्रसाद खिलाकर, आशीर्वाद लिया जाता है।

उनकी प्रार्थना का मंत्र है सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥ अर्थ सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, असुर और देवता भी जिनकी सदा सेवा करते हैं वे सिद्धियाँ देने वाली सिद्धिदात्री, हम पर सदा कृपा करें। उनका नाम-मंत्र है ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः। इसे एक माला, यानी एक सौ आठ बार, शांत मन से जपा जा सकता है।

आज का संदेश नौ दिनों में जो भी सीखा, उसे जीवन में उतारिए। साधना का असली फल यही है बेहतर इंसान बनना। हर सिद्धि चाहे संगीत हो, पढ़ाई हो या कोई हुनर रोज़ के अभ्यास और धैर्य से आती है। कोई शॉर्टकट नहीं।

और जब सफलता मिले, तो विनम्र रहिए। जैसे माँ सब कुछ देकर भी कमल पर शांत बैठी हैं कोई अहंकार नहीं। पूजा में माँ को तिल और हलवा-पूरी-चने का भोग लगाने की परंपरा है। कई जगह इस दिन मोरपंखी हरा रंग पहनना शुभ माना जाता है।

पर याद रखिए माँ भाव से प्रसन्न होती हैं, सामग्री से नहीं। आज माँ का धन्यवाद कीजिए इन नौ दिनों के लिए, इस जीवन के लिए। या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। कल विजयादशमी पर फिर मिलेंगे।

ज्योति यात्रा से जुड़े रहिए जय माता दी।

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