🪔 नवरात्रि 2026 — नौ देवी, नौ संदेश · भाग 8
नवरात्रि दिन 8 🔱 महाअष्टमी: माँ महागौरी की कथा, मंत्र, कन्या पूजन
नवरात्रि दिन 8 🔱 महाअष्टमी: माँ महागौरी की कथा, मंत्र, कन्या पूजन | नौ देवी, नौ संदेश
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आज नवरात्रि का आठवाँ दिन है महाअष्टमी। आज पूजा होती है माँ महागौरी की पवित्रता, शांति और क्षमा की देवी। महागौरी यानी अत्यंत गौर, अत्यंत उज्ज्वल। कहा जाता है उनका तेज शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल जैसा श्वेत है।
उनकी चार भुजाएँ हैं एक हाथ में त्रिशूल, एक में डमरू, और बाकी दो हाथ अभय और वरमुद्रा में। वस्त्र श्वेत, और वाहन सफ़ेद वृषभ, यानी बैल। कथा है शिव को पति रूप में पाने के लिए माँ पार्वती ने वर्षों तक कठोर तप किया। धूप, वर्षा और बर्फ़ सहते-सहते उनका शरीर धूल से ढक कर श्याम पड़ गया।
उनके तप से प्रसन्न होकर महादेव प्रकट हुए, और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। मान्यता है कि फिर शिव ने अपनी जटाओं से निकली गंगा के पवित्र जल से उन्हें स्नान कराया। और देवी का रूप चंद्रमा जैसा उज्ज्वल हो उठा। तभी से वे महागौरी कहलाईं।
इस कथा का अर्थ बहुत सुंदर है तप और धैर्य से मन पर जमी धूल धुल जाती है। जो भीतर से शुद्ध है, वही सच्चा उज्ज्वल है। अष्टमी और नवमी के दिन कई घरों में कन्या पूजन होता है। छोटी बच्चियों को देवी का रूप मानकर, उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है।
फिर उन्हें हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाया जाता है, और प्रेम से उपहार दिए जाते हैं। इस परंपरा का संदेश गहरा है हर बेटी में देवी का वास है। केवल नवरात्रि में नहीं, हर दिन उसका सम्मान, उसकी शिक्षा, उसकी सुरक्षा यही सच्ची पूजा है। अष्टमी और नवमी के मिलन के समय कई जगह संधि पूजा भी होती है एक सौ आठ दीयों और कमल के फूलों के साथ।
उनकी प्रार्थना का मंत्र है श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥ अर्थ जो श्वेत वृषभ पर सवार हैं, श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जो पवित्र हैं और महादेव को आनंद देती हैं वे महागौरी हमें शुभ फल दें। उनका नाम-मंत्र है ॐ देवी महागौर्यै नमः। इसे एक माला, यानी एक सौ आठ बार, शांत मन से जपा जा सकता है।
आज का संदेश मन की धूल धो डालिए। किसी से नाराज़गी है, तो आज क्षमा कर दीजिए। क्षमा कमज़ोरी नहीं, मन की सबसे बड़ी पवित्रता है। जो बोझ हम सालों से ढो रहे हैं शिकायतें, पछतावे, कड़वाहट उन्हें छोड़ देने से ही मन फिर से उजला होता है।
जैसे गंगा के जल से गौरी उज्ज्वल हुईं। और आज, घर की बेटियों से कहिए तुम हमारा गर्व हो। उनके सपनों को पंख दीजिए। पूजा में माँ को नारियल का भोग लगाने की परंपरा है, और कन्या पूजन में हलवा, पूरी, चना।
कई जगह इस दिन बैंगनी रंग पहनना शुभ माना जाता है। पर याद रखिए माँ भाव से प्रसन्न होती हैं, सामग्री से नहीं। आज किसी एक व्यक्ति को सच्चे मन से क्षमा करने का संकल्प लीजिए। या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
कल नवमी पर मिलेंगे माँ सिद्धिदात्री के साथ। ज्योति यात्रा से जुड़े रहिए जय माता दी।



