🪔 नवरात्रि 2026 — नौ देवी, नौ संदेश · भाग 19
दुर्गा सप्तशती कथा भाग 8 🔱 अध्याय 12 — पाठ का फल, देवी के अपने वचन
दुर्गा सप्तशती कथा भाग 8 🔱 अध्याय 12 — पाठ का फल, देवी के अपने वचन | नवरात्रि दिन 8
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नमस्ते, ज्योति यात्रा में आपका स्वागत है। आज सुनिए पुराणों की एक ऐसी कथा, जो बहुत कम सुनाई जाती है। नवरात्रि का आठवाँ दिन। श्री दुर्गा सप्तशती कथा का भाग आठ।
आज अध्याय बारह जिसमें स्वयं देवी बताती हैं कि इस माहात्म्य के पाठ और श्रवण से भक्त को क्या फल मिलता है। इस अध्याय के ध्यान में माँ दुर्गा हैं बिजली की माला जैसी कांति, सिंह के कंधे पर विराजमान, तीन नेत्र, मस्तक पर चंद्रमा, और हाथों में चक्र, गदा, खड्ग, ढाल, बाण, धनुष और पाश। तलवार और ढाल लिए कन्याएँ उनकी सेवा में खड़ी हैं। नारायणी स्तुति से प्रसन्न होकर देवी ने देवताओं से कहा जो मनुष्य एकाग्र मन से प्रतिदिन इन स्तुतियों से मेरी स्तुति करेगा, उसकी सारी बाधाएँ मैं निश्चय ही दूर करूँगी।
जो मधु-कैटभ के नाश की, महिषासुर के वध की, और शुम्भ-निशुम्भ के संहार की कथा का कीर्तन करेंगे — और जो अष्टमी, चतुर्दशी और नवमी के दिन एकाग्र होकर भक्ति से मेरे इस उत्तम माहात्म्य को सुनेंगे, उन्हें कोई पाप नहीं छू पाएगा। पाप से होने वाली विपत्ति और दरिद्रता भी उन पर नहीं आएगी। उन्हें शत्रु, चोर, राजा, शस्त्र, अग्नि और जल से भय नहीं होगा। उनका अपने प्रियजनों से वियोग नहीं होगा।
इसलिए मेरे इस माहात्म्य को सबको एकाग्र मन से पढ़ना चाहिए, और भक्तिपूर्वक सुनना चाहिए। यह परम कल्याणकारी है। मेरे मंदिर में, पूजा में, यज्ञ के हवन में, और उत्सवों में इस पूरे चरित्र का पाठ और श्रवण करना चाहिए। जानकर या अनजाने में किए गए उस पूजन और हवन को मैं प्रेम से स्वीकार करती हूँ।
शरत्काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी। तस्यां ममैतन्माहात्म्यं श्रुत्वा भक्तिसमन्वितः॥ शरद ऋतु में जो वार्षिक महापूजा होती है यानी यही शारदीय नवरात्रि उसमें जो भक्ति से मेरा यह माहात्म्य सुनता है, सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥ वह मनुष्य मेरी कृपा से सब बाधाओं से मुक्त होकर, धन, धान्य और संतान से संपन्न होगा इसमें कोई संशय नहीं। मेरे इस माहात्म्य और मेरे प्राकट्य की कथाओं को सुनकर मनुष्य युद्ध में निर्भय हो जाता है, उसके शत्रु नष्ट हो जाते हैं, और उसके कुल का आनंद बढ़ता है।
जहाँ बुरे सपने दिखाई दें, या ग्रहों की पीड़ा हो वहाँ मेरा यह माहात्म्य सुनना चाहिए। इससे उपद्रव शांत होते हैं, और बुरे सपने भी शुभ सपनों में बदल जाते हैं। बालग्रहों से घिरे बालकों के लिए यह शांति देने वाला है। मनुष्यों में आपस का बैर मिटाकर यह मित्रता कराने वाला है।
कोई निर्जन वन में हो, दावानल से घिरा हो, लुटेरों के बीच हो, शत्रुओं के हाथ में पकड़ा गया हो, या जंगल में सिंह, बाघ और जंगली हाथियों के बीच हो — राजा के क्रोध में वध या बंधन की आज्ञा मिली हो, या भयंकर तूफ़ान में बीच समुद्र में नाव डगमगा रही हो मेरे इस चरित्र का स्मरण करते ही वह संकट से मुक्त हो जाता है। मेरे प्रभाव से सिंह, चोर और शत्रु भी उससे दूर भाग जाते हैं जो मेरे इस चरित्र का स्मरण करता है। महर्षि मेधा कहते हैं ऐसा कहकर प्रचंड पराक्रम वाली भगवती चंडिका, देवताओं के देखते-देखते वहीं अंतर्धान हो गईं। शत्रुओं के मारे जाने से सब देवता निर्भय हो गए।
उन्हें फिर से यज्ञ के भाग मिलने लगे, और वे पहले की तरह अपने-अपने अधिकार भोगने लगे। और जिन्होंने संसार का विनाश किया था, जिनका पराक्रम अतुलनीय था वे शुम्भ-निशुम्भ देवी के हाथों मारे गए, और बचे हुए दैत्य पाताल लोक चले गए। मेधा ऋषि बोले राजन्, इस प्रकार भगवती अंबिका नित्य होते हुए भी बार-बार प्रकट होकर जगत की रक्षा करती हैं। वही इस संसार को मोहित करती हैं, वही इसे जन्म देती हैं, और प्रार्थना करने पर वही प्रसन्न होकर ज्ञान और समृद्धि देती हैं।
प्रलय के समय वही महामारी का रूप लेती हैं, और वही सृष्टि का बीज बनती हैं। संपन्नता के समय वही लक्ष्मी बनकर घर-घर में समृद्धि देती हैं, और विपत्ति के समय वही अलक्ष्मी बनकर विनाश का कारण बनती हैं। जो फूल, धूप, गंध और भक्ति से उनकी पूजा करते हैं, उन्हें वे धन, पुत्र, धर्म में मन, और शुभ गति देती हैं। यहीं बारहवाँ अध्याय पूरा होता है।
आज की सीख माँ ने सबसे बड़ा फल बताया: भय से मुक्ति। जहाँ भरोसा है, वहाँ डर नहीं टिकता। संकट में माँ का स्मरण, यही इस अध्याय का सार है। अष्टमी और नवमी के दिन घर में परिवार के साथ यह कथा सुनिए।
यह वीडियो कथा को सरल हिंदी में समझाता है यह संस्कृत पाठ का विकल्प नहीं है। पाठ की विधि अपनी परंपरा और प्रामाणिक पुस्तक से ही करें। कल, भाग नौ में, अंतिम अध्याय तेरह राजा सुरथ और समाधि वैश्य की तपस्या, और माँ का वरदान। जय माता दी।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। सुनने के लिए धन्यवाद। अगर यह वीडियो आपको अच्छा लगा, तो इसे अपने परिवार के साथ ज़रूर बाँटिए, और ऐसी ही पावन कथाओं के लिए जुड़े रहिए ज्योति यात्रा के साथ। भगवान की कृपा आप पर बनी रहे।



