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🪔 नवरात्रि 2026 — नौ देवी, नौ संदेश · भाग 6

नवरात्रि दिन 6 🔱 माँ कात्यायनी की कथा, मंत्र और पूजा विधि

4:16 · 2 दर्शन · 1 घं॰ पहले

नवरात्रि दिन 6 🔱 माँ कात्यायनी की कथा, मंत्र और पूजा विधि | नौ देवी, नौ संदेश

पूरी कथा पढ़ें

आज नवरात्रि का छठा दिन है माँ कात्यायनी का। वे देवी, जो धर्म की रक्षा के लिए योद्धा बनकर प्रकट हुईं। कथा है कत ऋषि के वंश में महर्षि कात्यायन हुए। उन्होंने वर्षों तक कठोर तप किया, इस कामना से कि आदिशक्ति उनके घर पुत्री के रूप में आएँ।

मान्यता है कि देवी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की। इसीलिए वे कात्यायन की पुत्री कात्यायनी कहलाईं। उस समय महिषासुर नाम के असुर ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवता हार चुके थे, और तीनों लोकों में भय था।

तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश, और सभी देवताओं के तेज से एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई और उस ज्योति ने देवी का रूप लिया। कहा जाता है कि सबसे पहले महर्षि कात्यायन ने ही उनकी पूजा की। इस कथा के अनेक रूप हैं, पर भाव एक देवी धर्म की रक्षा के लिए आती हैं। देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र दिए शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, और हिमालय ने वाहन के रूप में सिंह।

फिर हुआ महासंग्राम। माँ सिंह पर सवार होकर रणभूमि में उतरीं, और महिषासुर की विशाल सेना को परास्त किया। अंत में देवी ने महिषासुर का अंत किया। इसीलिए वे महिषासुरमर्दिनी भी कहलाती हैं।

देवताओं ने पुष्प बरसाए। माँ कात्यायनी की एक और सुंदर कथा भागवत पुराण में है। ब्रज की गोपियों ने यमुना तट पर, पूरे एक महीने कात्यायनी व्रत रखा। उनकी प्रार्थना थी कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।

नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥ यानी हे देवी, नंद के पुत्र श्रीकृष्ण को मेरा पति बनाइए। उनकी प्रार्थना का मंत्र है चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥ अर्थ जिनके हाथ में चंद्रहास नाम की चमकती तलवार है, और जो श्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं असुरों का नाश करने वाली वे कात्यायनी देवी, हमें शुभ फल दें। उनका नाम-मंत्र है ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।

इसे एक माला, यानी एक सौ आठ बार, शांत मन से जपा जा सकता है। योग परंपरा में उन्हें आज्ञा चक्र से जोड़ा जाता है दोनों भौंहों के बीच का केंद्र। यानी स्पष्ट सोच, और सही निर्णय की शक्ति। आज का संदेश जहाँ अन्याय हो, वहाँ चुप मत रहिए।

सही बात के लिए खड़े होने का साहस यही माँ कात्यायनी की शक्ति है। पर ध्यान रखिए माँ का क्रोध व्यक्ति पर नहीं, बुराई पर है। उनका एक हाथ तलवार उठाता है, तो दूसरा अभय और आशीर्वाद देता है। साहस के साथ करुणा भी।

पूजा में माँ को शहद का भोग लगाने की परंपरा है, और लाल फूल, विशेषकर गुलाब, प्रिय माने जाते हैं। कई जगह इस दिन हरा रंग पहनना शुभ माना जाता है। पर याद रखिए माँ भाव से प्रसन्न होती हैं, सामग्री से नहीं। आज अपने भीतर के किसी एक डर पर विजय पाने का संकल्प लीजिए।

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। कल मिलेंगे माँ कालरात्रि के साथ। ज्योति यात्रा से जुड़े रहिए जय माता दी।

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