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🪔 नवरात्रि 2026 — नौ देवी, नौ संदेश · भाग 5

नवरात्रि दिन 5 🔱 माँ स्कंदमाता की कथा, मंत्र और पूजा विधि

3:47 · 17 दर्शन · 14 घं॰ पहले

नवरात्रि दिन 5 🔱 माँ स्कंदमाता की कथा, मंत्र और पूजा विधि | नौ देवी, नौ संदेश

पूरी कथा पढ़ें

आज नवरात्रि का पाँचवाँ दिन है माँ स्कंदमाता का। वे माँ, जिनकी गोद में स्वयं देवताओं के सेनापति बैठे हैं। स्कंद यानी भगवान कार्तिकेय। और स्कंदमाता यानी स्कंद की माता।

यह माँ पार्वती का वात्सल्य से भरा, ममतामयी रूप है। उनकी चार भुजाएँ हैं। ऊपर के दोनों हाथों में कमल, एक हाथ से बालक स्कंद को गोद में संभाले हुए, और एक हाथ वरमुद्रा में आशीर्वाद देता हुआ। वे कमल के आसन पर विराजती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।

और उनका वाहन है सिंह। कथा है तारकासुर नाम के एक असुर ने कठोर तप करके वरदान पाया, कि उसकी मृत्यु केवल शिव के पुत्र के हाथों हो। उस समय महादेव, सती के वियोग में गहरी समाधि में लीन थे। तारकासुर ने सोचा शिव तो विवाह करेंगे ही नहीं।

और वह तीनों लोकों को सताने लगा। तब माँ पार्वती ने कठोर तप किया, और शिव को पति रूप में पाया। उनके तेज से जन्म हुआ कुमार कार्तिकेय, यानी स्कंद का। बड़े होकर स्कंद देवताओं के सेनापति बने।

मोर पर सवार, हाथ में शक्ति-भाला और उन्होंने तारकासुर का अंत कर, तीनों लोकों को भय से मुक्त किया। जिस माँ ने ऐसे वीर पुत्र को जन्म दिया, उन्हें ही हम स्कंदमाता के रूप में पूजते हैं। मान्यता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से, उनकी गोद में बैठे बालक स्कंद की पूजा भी अपने आप हो जाती है। यानी एक साथ दो आशीर्वाद।

योग परंपरा में उन्हें विशुद्धि चक्र से जोड़ा जाता है कंठ का केंद्र। यानी सच्ची, शुद्ध और मधुर वाणी। उनकी प्रार्थना है सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ अर्थ जो सदा सिंहासन पर विराजती हैं, जिनके दोनों हाथ कमलों से सुशोभित हैं वे यशस्विनी स्कंदमाता, सदा हमारा कल्याण करें।

उनका नाम-मंत्र है ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः। इसे एक माला, यानी एक सौ आठ बार, शांत मन से जपा जा सकता है। आज का संदेश माँ का प्रेम कोमल भी होता है, और अडिग भी। स्कंदमाता की गोद में बालक है, पर पास में सिंह भी खड़ा है।

सच्चा प्रेम बच्चे को केवल संभालता नहीं उसे आगे बढ़ने, अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ने का साहस भी देता है। जैसे माँ ने स्कंद को सेनापति बनने दिया। और आज, अपनी माँ के लिए या जिसने आपको माँ जैसा प्रेम दिया कुछ समय निकालिए। एक फ़ोन, एक धन्यवाद, एक मुस्कान।

पूजा में माँ को केले का भोग लगाने की परंपरा है। कई जगह इस दिन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। पर याद रखिए माँ भाव से प्रसन्न होती हैं, सामग्री से नहीं। आज किसी बच्चे को, प्रेम से कुछ अच्छा सिखाने का संकल्प लीजिए।

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। कल मिलेंगे माँ कात्यायनी के साथ। ज्योति यात्रा से जुड़े रहिए जय माता दी।

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