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🪔 नवरात्रि 2026 — नौ देवी, नौ संदेश · भाग 4

नवरात्रि दिन 4 🔱 माँ कूष्मांडा की कथा, मंत्र और पूजा विधि

4:03 · 1 दर्शन · 1 घं॰ पहले

नवरात्रि दिन 4 🔱 माँ कूष्मांडा की कथा, मंत्र और पूजा विधि | नौ देवी, नौ संदेश

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आज नवरात्रि का चौथा दिन है माँ कूष्मांडा का। वे देवी, जिनकी मुस्कान से सृष्टि का जन्म हुआ। कहा जाता है जब सृष्टि नहीं थी, चारों ओर केवल अंधकार था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। कू यानी थोड़ा, ऊष्मा यानी गर्मी या ऊर्जा, और अंड यानी ब्रह्मांड।

थोड़ी-सी ऊष्मा से ब्रह्मांड रचने वाली कूष्मांडा। मान्यता है कि उनका निवास सूर्यमंडल के भीतर है। सूर्य जैसा तेज सहने की शक्ति केवल उन्हीं में है इसीलिए उनका तेज सूर्य के समान दमकता है। उनकी आठ भुजाएँ हैं, इसलिए वे अष्टभुजा देवी भी कहलाती हैं।

हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत-कलश, चक्र, गदा और जपमाला। उनका वाहन सिंह है। उनकी ऊर्जा से ही सूर्य को प्रकाश मिला, धरती को जीवन, और हर प्राणी को साँस। संस्कृत में कूष्मांड का एक अर्थ कुम्हड़ा, यानी पेठा भी है।

कई परंपराओं में इस दिन माँ को कुम्हड़ा अर्पित करने की प्रथा है। देवी कूष्मांडा की कथा छोटी है, पर संदेश बहुत बड़ा एक मुस्कान, अँधेरे को उजाले में बदल सकती है। मान्यता है कि उनकी उपासना से रोग-शोक दूर होते हैं, और मन में नई ऊर्जा का संचार होता है। वे आयु, यश और बल की देवी मानी जाती हैं।

योग परंपरा में उन्हें अनाहत चक्र से जोड़ा जाता है यानी हृदय का केंद्र, जहाँ प्रेम और करुणा बसते हैं। चौथे दिन साधक का मन शांत, और हृदय खुला होना चाहिए क्योंकि माँ प्रेम से ही प्रसन्न होती हैं। उनका ध्यान मंत्र सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥ अर्थ जो अपने कमल जैसे हाथों में दो पूर्ण कलश धारण करती हैं मान्यता है कि ये सृष्टि के अमृत और जीवन-शक्ति के प्रतीक हैं वे कूष्मांडा देवी मेरा मंगल करें।

उनका नाम-मंत्र है ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। इसे एक माला, यानी एक सौ आठ बार, शांत मन से जपा जा सकता है। आज का संदेश आपकी एक मुस्कान किसी का अँधेरा दूर कर सकती है। जैसे एक दीया, दूसरे दीये को जलाता है।

घर में, दफ़्तर में, रास्ते में एक सच्ची मुस्कान, एक मीठा शब्द। यही छोटी-सी ऊष्मा, किसी का पूरा दिन बदल सकती है। और अपने भीतर की ऊर्जा का ध्यान रखिए सुबह की धूप, अच्छी नींद, सादा भोजन। जो स्वयं प्रकाशित है, वही दूसरों को प्रकाश दे सकता है।

पूजा में माँ को मालपुए का भोग लगाने की परंपरा है। कई जगह इस दिन रॉयल ब्लू, यानी गहरा नीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। पर याद रखिए माँ भाव से प्रसन्न होती हैं, सामग्री से नहीं। आज किसी एक व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने का संकल्प लीजिए।

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्मांडा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। कल मिलेंगे माँ स्कंदमाता के साथ। ज्योति यात्रा से जुड़े रहिए जय माता दी।

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